NATIONAL MATHEMATICS DAY

आज महाविद्यालय में राष्ट्रीय गणित दिवस के उपलक्ष्य में आईक्यूएसी और गणित विभाग के सयुंक्त तत्वाधान में महान गणितज्ञ श्री निवासन रामानुजन का जयंती मनाया गया इसके साथ ही मैथमेटिक्स क्विज प्रतियोगिता का भी आयोजन किया गया था जिसमें महाविद्यालय के चारों समूह संकल्प, सामर्थ्य, सार्थक और संपूर्ण के छात्रों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया।

इस कार्यक्रम में महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ.रितेश वर्मा, गणित विभाग की विभागप्रमुख सुश्री प्रिया कुशवाहा, कंप्यूटर एप्लिकेशन विभाग के विभागप्रमुख श्री संदीप डे, सूचना प्रौद्योगिकी विभाग के विभागप्रमुख श्री वेदप्रकाश पटेल, वाणिज्य और प्रबंधन विभाग के विभागप्रमुख श्री सूरज अरुण मिश्रा, रसायन विभाग की विभागप्रमुख सुश्री आशामुनि दास ,जंतु विज्ञान विभाग की विभागप्रमुख सुश्री दीपशिखा अम्बस्ट, वनस्पति विभाग के विभागप्रमुख श्री घनश्याम मैत्री, सहायक प्राध्यापक (कंप्यूटर विज्ञान) अफ़रोज़ अंसारी और सभी विभागों के सहायक प्राध्यापक एवं छात्र-छात्राएं उपस्थित थे। कार्यक्रम के सफल आयोजन में सहायक प्राध्यापक (गणित) श्री विषेक साहू एवं श्रीमती ज्योति सोनी का विशेष योगदान रहा।

कार्यक्रम का आरंभ में प्राचार्य डॉ रितेश वर्मा ने छात्र-छात्राओं को सम्बोधित करते हुए कहा की रामानुजन और इनके द्वारा किए गए अधिकांश कार्य अभी भी वैज्ञानिकों के लिए अबूझ पहेली बने हुए हैं। एक बहुत ही सामान्य परिवार में जन्म ले कर पूरे विश्व को आश्चर्यचकित करने की अपनी इस यात्रा में इन्होने भारत को अपूर्व गौरव प्रदान किया। रामानुजन के गणित में काम करने की शैली भी विचित्र थी। वे कभी कभी आधी रात को सोते से जाग कर स्लेट पर गणित से सूत्र लिखने लगते थे और फिर सो जाते थे। इस तरह ऐसा लगता था कि वे सपने में भी गणित के प्रश्न हल कर रहे हों। रामानुजन का आध्यात्म के प्रति विश्वास इतना गहरा था कि वे अपने गणित के क्षेत्र में किये गए किसी भी कार्य को आध्यात्म का ही एक अंग मानते थे। वे धर्म और आध्यात्म में केवल विश्वास ही नहीं रखते थे बल्कि उसे तार्किक रूप से प्रस्तुत भी करते थे। वे कहते थे कि “मेरे लिए गणित के उस सूत्र का कोई मतलब नहीं है जिससे मुझे आध्यात्मिक विचार न मिलते हों।”

इस के उपरांत गणित विभाग की विभागप्रमुख सुश्री प्रिया कुशवाहा ने गणित के पिता कहे जाने वाले महान गणितज्ञ श्रीनिवास रामानुजन के बारे में जानकारी दी तथा मैथेमेटिस का जीवन में महत्व को बताया। उन्होंने कहा की रामानुजन धार्मिक प्रवृत्ति और शांत स्वभाव के चिन्तनशील बालक थे। अपने खपरैल की छत वाले पुश्तैनी घर के सामने एक ऊंचे चबूतरे पर बैठ कर रामानुजन गणित के सवाल हल करने में डूब जाते थे। रामानुजन का गणित के प्रति जबर्दस्त लगाव था। विशुद्ध गणित के अतिरिक्त अन्य विषयों, जैसे गणितीय भौतिकी और अनुप्रयुक्त गणित में उनकी रुचि नहीं थी। रामानुजन गणित की खोज को ईश्वर की खोज के सदृश मानते थे। इसी कारण गणित के प्रति उनमें गहरा लगाव था। उन्हें विश्वास था कि गणित से ही ईश्वर का सही स्वरूप स्पष्ट हो सकता है। वे संख्या ‘एक’ को अनन्त ईश्वर का स्वरूप मानते थे। वे रात दिन संख्याओं के गुणधर्मों के बारे में सोचते, मनन करते रहते थे और सुबह उठकर कागज पर अकसर सूत्र लिख लिया करते थे। उनकी स्मृति और गणना शक्ति अद्भुत थी। वे π, √2, e आदि संख्याओं के मान दशमलव के हजारवें स्थान तक निकाल लेने में सक्षम थे। यह उनकी गणितीय मेधा का प्रमाण है।

कार्यक्रम में अगली कड़ी में मैथमेटिक्स क्विज प्रतियोगिता आरम्भ हुआ। इस प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता को 5 राउंड में बांटते हुए सभी समूह को उसके नियम विस्तार से बताए गए। क्विज मास्टर की भूमिका में महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. रितेश वर्मा थे जिनके द्वारा सभी राउंड में प्रश्न पूछे गए। स्कोरर की भूमिका में कंप्यूटर एप्लिकेशन विभाग के विभागप्रमुख श्री संदीप डे थे। 5 राउंड तक चले प्रतियोगिता में छात्र-छात्राओं के अच्छे प्रयास के फल स्वरूप प्राप्त अंकों के अनुसार S1 को 3900 अंक, S2 को 4800 अंक, S3 को 5200 एवं S4 को 4000 अंक प्राप्त हुए। जिसके आधार पर महाविद्यालय के प्राचार्य के द्वारा S3 टीम को विजेता और S2 टीम को उप विजेता घोषित करते हुए सम्मानित किया।

इस कार्यक्रम की कुछ प्रमुख झलकियां इस प्रकार रही –